5 दशक की राजनीति में छाए रहे शहरबन्नी के राम विलास पासवान। रामविलास पासवान का निधन

5 दशक की राजनीति में छाए रहे शहरबन्नी के राम विलास पासवान। रामविलास पासवान का निधन | केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान | शाम में पटना पहुंचेगा शव

रामविलास पासवान का निधन

बिहार में चुनावी सरगर्मी के बीच लोक जनशक्ति पार्टी के संस्‍थापक व केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रामविलास पासवान नहीं रहे। रामविलास पासवान का गुरुवार देर शाम दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल में निधन हो गया। और इसकी जानकारी उनके पुत्र और लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने ट्वीट कर कर दी। रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शनिवार को उनके हार्ट की सर्जरी हुई थी। उनके दिल और किडनी की ठीक से काम करना बंद क्र दिया था। इस वजह करके उन्हें कुछ दिन आइसीयू में एक्मो मशीन के सपोर्ट पर रखा गया था। लेकिन डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बावजूद , गुरुवार की शाम 6:05 बजे उनका दिल्ली के हस्पताल फोर्टिस में निधन हो गया । उनकी उम्र 74 साल थी। वर्ष 1977 में पहली बार मतों के विश्व रिकॉर्ड के अंतर से जीतकर लोकसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। केंद्र में एनडीए की सरकार हो या यूपीए की, उनका महत्व समान रूप से बना रहा। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

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राम विलास पासवान का सफर

रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 में हुआ था। उनका पैतृक गांव खगड़िया जिले के अलौली स्थित शहरबन्नी गांव है। उनकी शादी 1960 में राजकुमारी देवी के साथ हुई थी। बाद में 1981 में उस पत्नी को तलाक देकर दूसरी शादी 1983 में रीना शर्मा से की। पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए और लॉ ग्रेजुएट की डिग्री ली। वह नॉनवेज पसंद करते हैं। मछली उनकी पहली पसंद थी। पहली बार वे 1969 में एक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में बिहार विधानसभा पहुंचे। राम विलास पासवान पांच दशक से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में थे और देश के जाने-माने दलित नेताओं में से एक थे।

वे बिहार की राजनीति में पांच दशक से एक मजबूत स्तंभ बने रहे। खगड़िया के शहरबन्नी गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे पासवान ने छात्रसंघ से राजनीति में कदम रखा था। वह जेपी आंदोलन में भी बिहार में मुख्य किरदार थे |

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1983 में उन्होंने दलित मुक्ति और कल्याण के लिए एक संगठन दलित सेना की स्थापना की। 1989 में लोकसभा के लिए फिर से चुने गए और उन्हें विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केंद्रीय श्रम और कल्याण मंत्री बने।पासवान उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री थे। खगड़िया के शहरबन्नी गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे पासवान ने छात्रसंघ से राजनीति में कदम रखा था।

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राजनीति का मौसम वैज्ञानिक

राम विलास पासवान को राजनीति का बड़ा मौसम वैज्ञानिक माना जाता था। चाहे सरकार किसी की भी रही हो , राम विलास पासवान हमेशा सत्‍ता में रहे है । उनकी ख़ास बात यह थी की उन्‍होंने हमेशा चुनाव के पहले गठबंधन किया, चुनाव के बाद कभी नहीं किया । आपात काल के दौरान इंदिरा गांधी से लड़ने से लेकर अगले पांच दशकों तक पासवान कई बार कांग्रेस के साथ, तो कभी खिलाफ चुनाव लड़ते और जीतते रहे।

राजनीतिक जीवन बनाया में जीत का वर्ल्‍ड रिकार्ड– करीब आधी सदी के अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्‍होंने 11 चुनाव लड़े, जिनमें नौ में उनकी जीत भी हुई। पासवान के पास छ‍ह प्रधानमंत्रियों के साथ उनकी सरकार में मंत्री रहने रिकॉर्ड है। 2014 तक उन्होंने आठ बार लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की। वर्तमान में वे राज्यसभा के सदस्य तथा नरेंद्र मोदी सरकार में उपभोक्‍ता मामलों तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री थे। पटना में राजकीय सम्‍मान के साथ होगा अंतिम संस्‍कार|

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